सरकार ने यात्री उड़ानों को 25 मई से संचालित करने के लिए दिशानिर्देशों में किया नया संशोधन

सरकार ने यात्री उड़ानों को 25 मई से संचालित करने के लिए दिशानिर्देशों में किया नया संशोधन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharam) द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज में बिना किसी राहत व लॉकडाउन में विस्तार के कारण कई एयरलाइन्स ने भविष्य के खतरे के बारे में आगाह किया।

जिसके बाद तीन दिनों के भीतर ही हवाई यात्रा पर निर्णय बदल दिया। 17 मई को सरकार ने घोषणा की कि घरेलू यात्रा 31 मई तक प्रतिबंधित रहेगी। वहीं तीन दिनों के भीतर सरकार ने गुरुवार को यात्री उड़ानों को 25 मई से संचालित करने के लिए दिशानिर्देशों में नया संशोधन किया।

इसी महीने की आरंभ में उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इशारा दिये थे कि 15 मई से घरेलू विमानन सेवाएं शुरु हो जाएंगी। से संबंधित एक ऑफिसर ने कहा, 'एयरलाइंस द्वारा मुख्य तर्क यह दिया गया था कि स्थगित सेवा का प्रयोग नहीं किया जा सकता है, इसलिए, होटल, भोजनालयों आदि के साथ-साथ एयरलाइनों को निर्माण फर्मों पर एक बड़ी सहायता दी जानी चाहिए, खासकर जब से संसार के सबसे लंबे समय तक हिंदुस्तान का लॉकडाउन कठोर है। '

इसके बाद एयरलाइनों को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बताया गया कि 'एक बड़े पैकेज' की घोषणा की जा रही है व इसमें सर्विस सेक्टर्स का जिक्र होगा, लेकिन नागरिक उड्डयन के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित तरीकों में वे शामिल थे जिनकी इससे पहले घोषणा की गई थी। इनमें हवाई अड्डों के रखरखाव, मरम्मत व ओवरहालऔर भारतीय हवाई क्षेत्र, माल व सेवा कर राहत शामिल था। एयरलाइंस ने की बैठक

रविवार को एयरलाइंस ने इस पर नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ मीटिंग की मांग की थी। एक वरिष्ठ सरकारी ऑफिसर के अनुसार, सी-लेवल एयरलाइन के अधिकारियों ने मंत्रालय के दरवाजे खटखटाने प्रारम्भ कर दिए। वह जानना चाह रहे थे कि  क्या कोई व उपाय जारी किये जा सकते हैं जिसमें विमानन सेवाओं को फिर शुरु करने की आसार पर बात की गई थी। लेकिन गृह दिशानिर्देश 17 मई शाम को जारी किए गए जिसमें 31 मई तक वाणिज्यिक हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसमें इसका भी जिक्र नहीं था कि यह सेवाएं कब प्रारम्भ होंगी।

18 मई को एयरलाइन के अधिकारियों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की व बोला कि उन्हें बढ़ते लोन का भुगतान करने के लिए 'लोगों को बर्खास्त करने व बेड़े का उपयोग करने के लिए विवश हो सकते हैं व वे दिवालिया हो सकते हैं। '  उन्होंने तर्क दिया कि जब ट्रेन - रेड जोन से ग्रीन जोन में जा सकती हैं तो एयरलाइंस क्यों नहीं उड़ सकती हैं। उनके पास अधिक ऑपरेटिंग इनवायरमेंट है व ज्यादातर रेड जोन्स से उड़ान भरेंगे। जिसमें दिल्ली-मुंबई, या मुंबई-चेन्नई जैसे रेड जोन शामिल है।