अंतराष्ट्रीय बिजनेस स्कूलों में आवेदन के मामले में भारत बना नंबर 1

अंतराष्ट्रीय बिजनेस स्कूलों में आवेदन के मामले में भारत बना नंबर 1

भारत ने अंतराष्ट्रीय बिजनेस स्कूलों में आवेदन के मामले में चीन को पछाड़ दिया। इस साल भारतीयों द्वारा फुल टाइम एमबीए कार्यक्रमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बिजनेस स्कूलों में सबसे बड़ी संख्या में आवेदन भेजे गए हैं। जबकि चीन ने पिछले साल इस मामले में बढ़त बनाते हुए नंबर एक स्थान हासिल किया था। लेकिन अब बारी भारत की थी और पिछले वर्ष की तुलना में अंतर्राष्ट्रीय आवेदकों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि के साथ चीन को पछाड़ दिया, जबकि इस दौरान ड्रैगन के देश में आवदनों में काफी कमी भी देखने को मिली।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार चाहे वो फुल टाइम कोर्स हो या पार्ट टाइम भारतीय द्वारा भेजे गए अंतर्राष्ट्रीय आवेदनों की सूची में सबसे ज्यादा है। ग्रेजुएट बिजनेस स्कूलों के वैश्विक संघ, ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल ने बुधवार को अपना वार्षिक 2021 एप्लीकेशन ट्रेंड सर्वे जारी किया। लगभग 1,000 एमबीए और बिजनेस मास्टर कार्यक्रमों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 2021 में स्नातक बिजनेस स्कूल कार्यक्रमों के लिए आवेदनों की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 0.4% बढ़ी है। जब दुनिया भर में बिजनेस स्कूलों ने असामान्य रूप से देखा वहीं भारत ने 2020 में कोविड महामारी के आगमन के बाद से बढ़ी हुई मांग को बनाए रखा है। 

जीएमएसी के सीईओ संगीत चौफला का कहना है कि उम्मीदवारों ने कोविड-प्रेरित मंदी के दौरान वैकल्पिक कैरियर विकल्पों की तलाश की और बिजनेस स्कूलों ने अधिक लचीली प्रवेश नीतियां पेश कीं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साल आवेदन की मात्रा बढ़ गई। 2020 की तुलना में जीएमई कार्यक्रमों के लिए आवेदनों की सामान्य थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय उम्मीदवारों से आवेदन की मात्रा में वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तन ने घरेलू उम्मीदवारों से 3.8% की गिरावट की तुलना में 4.1% की वृद्धि दिखाई।


12वीं के पेपर में पूछे गए इस सवाल को CBSE ने बताया ‘अनुचित’, होगी कार्रवाई

12वीं के पेपर में पूछे गए इस सवाल को CBSE ने बताया ‘अनुचित’, होगी कार्रवाई

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं क्लास की टर्म-1 बोर्ड परीक्षा में पूछे गए एक सवाल पर माफी मांगी है और इसे ‘अनुचित’ बताते हुए ‘जिम्मेदार व्यक्तियों’ के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. दरअसल, बोर्ड परीक्षा के सोशियोलॉजी पेपर में 2002 के गुजरात दंगों पर पूछे गए सवाल से विवाद पैदा हुआ है. सवाल था- “गुजरात में साल 2002 में मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा किस सरकार के शासनकाल में हुआ?” इसके लिए चार ऑप्शन दिए गए थे- कांग्रेस, बीजेपी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन.

एग्जाम के कुछ ही घंटों बाद सीबीएसई ने इस सवाल को पूछे जाने पर माफी मांग ली. ट्विटर पर सीबीएसई ने एक बयान में लिखा, “आज की क्लास 12 सोशियोलॉजी की टर्म 1 परीक्षा में एक अनुचित प्रश्न पूछा गया, जो प्रश्न पत्र सेट करने के लिए एक्सटर्नल सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के लिए सीबीएसई गाइडलाइंस का उल्लंघन है. सीबीएसई ने इस गलती को स्वीकार किया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”

एक और ट्वीट में सीबीएसई ने कहा, “पेपर सेट करने वालों के लिए सीबीएसई गाइडलाइंस स्पष्ट है कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सवाल सिर्फ एकेडमिक होने चाहिए और वर्ग, धर्म को लेकर न्यूट्रल होने चाहिए. उन्हें उन पहलुओं को नहीं छूना चाहिए, जो सामाजिक और राजनीतिक विकल्पों के आधार पर लोगों की भावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं.”

दरअसल, 2002 में गुजरात में दंगों के वक्त भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार थी और राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे. गोधरा में 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के कोच एस6 को आग लगा दी गई थी. ट्रेन के इस डिब्बे में आयोध्या की यात्रा करने वाले कार सेवक सवार थे. इस आगजनी में 59 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद गुजरात में कई जगहों पर दंगे शुरू हो गए और इन दंगों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सीबीएसई परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने में सब्जेक्ट एक्सपर्ट के दो पैनल होते हैं- पेपर सेटर्स और मॉडरेटर्स. एक्सपर्ट्स की पहचान गोपनीय रखी जाती है. यहां तक कि पेपर सेटर्स को नहीं पता होता है कि उनके चुने गए सवाल का प्रश्न पत्र में इस्तेमाल किया जाएगा. प्रश्न पत्र को मॉडरेटर्स के द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सवाल विषय के सिलेबस, संबंधित किताबों के तहत पूछे गए हैं.