यूनिसेफ को 60 प्रतिशत तक वैक्सीन उपलब्ध कराने वाला हिंदुस्तान इस बार हो सकता है सफल 

यूनिसेफ को 60 प्रतिशत तक वैक्सीन उपलब्ध कराने वाला हिंदुस्तान इस बार हो सकता है सफल 

कोरोना वैक्सीन या टीके को लेकर दुनियाभर में 140 अध्ययन चल रहे हैं, जिनमें से अब तक 11 अध्ययन मानव परीक्षण तक पहुंचे हैं. इनमें से एक हिंदुस्तान की स्वदेशी कोवैक्सिन भी है.

 विशेषज्ञों के मुताबिक, वैक्सीन की खोज करने में कामयाबी किसी भी देश को मिले, लेकिन बगैर हिंदुस्तान के इसे दुनियाभर में उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, क्योंकि पिछले कई सालों में वैक्सीन पर हिंदुस्तान का सहयोग बहुत ज्यादा है. यूनिसेफ को 60 प्रतिशत तक वैक्सीन उपलब्ध कराने वाला हिंदुस्तान नया टीका खोजने में सफल भी हो सकती है.


रविवार को विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर टीवी वैंकटेश्वरन ने बताया, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट का अध्ययन सबसे आगे चल रहा है. यह खोज एस्ट्राजेनेका ब्रिटिश कंपनी के साथ मिलकर की जा रही है.

ऑक्सफोर्ड का टीका भी यहीं बनेगा

ब्रिटिश कंपनी से पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने उत्पादन से जुड़ा करार भी किया हुआ है. वाशिंगटन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान भी अध्ययन कर रहा है. हिंदुस्तान की कंपनियों ने उत्पादन के कई करार किए हुए हैं. डाक्टर वैंकटेश्वरन बताया, हिंदुस्तान की छह कंपनियां वैक्सीन की खोज में जुटी हैं, जिनमें से दो को मानव परीक्षण के फेज एक और दो की अनुमति मिल चुकी है.

दुनिया के ज्यादातर अध्ययनों में भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान

दिल्ली एम्स के निदेशक डाक्टर रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, उन्हें पूरी उम्मीद है कि हिंदुस्तान वैक्सीन बनाने में सफल होगा. संसार के ज्यादातर अध्ययन में भारतीय वैज्ञानिक सहयोग दे रहे हैं. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला का बोलना है कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन की एक बिलियन डोज का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट में ही किया जाना है. 

वैसे यह ब्रिटिश अध्ययन फेज 3 के अंतिम चरण में है. इसके बाद एक बड़ी आबादी पर वैक्सीन परीक्षण कार्य प्रारम्भ होगा, जिसके लिए निर्माण काम उनके यहां प्रारम्भ होने वाला है. यह परीक्षण अगले कुछ महीनों में हिंदुस्तान के चुनींदा शहरों में भी होने कि सम्भावना है. एक बिलियन वैक्सीन की डोज हिंदुस्तान व आसपास के राष्ट्रों के लिए रहेगी.