रक्षा के क्षेत्र में साझेदारी की तलाश में भारत और कजाखस्तान, राजनाथ सिंह ने अपने समकक्ष नूरलान के साथ बैठक की

रक्षा के क्षेत्र में साझेदारी की तलाश में भारत और कजाखस्तान, राजनाथ सिंह ने अपने समकक्ष नूरलान के साथ बैठक की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कजाखस्तान के अपने समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल नूरलान येरमेकबायेव के साथ बैठक की। इस वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को लेकर संभावनाए तलाशने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस द्विपक्षीय वार्ता के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा और सुरक्षा के सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास और सैन्य क्षमता बढ़ाने समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया। ध्यान रहे नुरलान यरमेकबेयेव सात से दस अप्रैल तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। रक्षा मंत्रालय की मानें तो आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए ही रक्षा साझेदारी की संभावना तलाशने पर सहमत हैं।

यरमेकबेयेव 7-10 अप्रैल के आधिकारिक दौरे पर भारत आए हैं। नुरलान यरमेकबेयेव ने राजनाथ सिंह को संयुक्त राष्ट्र की अंतरिम फोर्स में कजाख बलों की तैनाती का मौका देने पर धन्यवाद कहा है। सीडीएस जनरल बिपिन रावत, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, रक्षा सचिव अजय कुमार, रक्षा उत्पादन सचिव राजकुमार और कई अन्य बड़े अधिकारी भी इस प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में शामिल हुए।


दिल्ली आने से पहले, यरमेकबेयेव जयपुर स्थित 12वीं कोर बटालियन के मुख्यालय और जैसलमेर के लोंगेवाल सेक्टर का दौरा करने भी गए थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर बताया- हमने द्विपक्षीय रक्षा समझौतों की व्यापक समीक्षा की। साथ ही रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तौर-तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया।  


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


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