अमित शाह के लोकसभा में यह विधेयक को पेश करते ही विपक्षी दलों ने शुरू कर दिया हंगामा

 अमित शाह के लोकसभा में यह विधेयक को पेश करते ही विपक्षी दलों ने शुरू कर दिया हंगामा

होम मिनिस्टर अमित शाह के लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा करना प्रारम्भ कर दिया. विधेयक पेश करते हुए अमित शाह ने बोला कि यह बिल अल्पसंख्यकों के विरूद्ध नहीं है. उन्होंने बोला कि वह हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं व विपक्ष को बोला कि वॉक आउट मत कर जाना. वहीं शिवसेना संसद में सोमवार को इस विधेयक का समर्थन कर सकती है. शाह ने बताया कि इस बिल की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन किया.

अमित शाह ने कहा, यह बिल संविधान के किसी अनुच्छेद के विरूद्ध नहीं है व ना ही अनुच्छेद 14 के विरूद्ध है. ऐसा पहली बार नहीं है कोई सरकार नागरिकता पर कोई बिल लेकर आए है. 1971 में इंदिरा सरकार ने निर्णय लिया था कि बंग्लादेश से आए सभी लोगों को नागरिकता दी जाए. तो पाक के लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी गई. फिर वो सरकार बिल लेकर युगांडा वालों को नागरिकता दी गई इंग्लैंड वालों को नहीं.

उन्होंने बोला कि इस सरकार को पांच वर्ष के लिए चुना है व सुनना तो पड़ेगा. इस बिल में हिंदुस्तान की सीमा से सटे अफगानिस्तान, पाक व बाग्लादेश से जुड़ा हुआ है. उन्होंने बोला कि क्या विपक्ष नहीं मानता है पीओके हिंदुस्तान का भाग है. उन्होंने बोला कि अफगानिस्तान, पाक व बाग्लादेश के संविधान के मुताबिक उनके प्रदेश का धर्म इस्लाम होगा.

कांग्रेस सांसद अधिर रंजन चौधरी ने बोला कि अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. बिल संविधान के विरूद्ध के विरूद्ध है. इस पर अमित शाह ने बोला कि बिल में मुसलमानों का नाम नहीं है. सौगत राय ने कहा, अमित शाह सदन में नए है व उनको नियमों के बारे में नहीं पता है. इस पर अमित शाह ने बोला कि तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है.

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट किया, “गैरकानूनी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए व अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता देनी होगी लेकिन अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें - व उन्हें मताधिकार न दें - इस पर आप क्या कहते हैं? व हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ, क्या अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वे कश्मीर लौट गए.”

उल्लेखनीय है कि शिवसेना ने हाल ही में महाराष्ट्र में बीजेपी से अलग होकर कांग्रेस पार्टी व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पाटीर् के साथ महा विकास अघाड़ी गठबंधन सरकार बनाई है. ऐसे में अटकले लगाई जा रही थी कि क्या शिवसेना इस विधेयक का समर्थन करेगी या नहीं.

नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019, के तहत उन हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनों, व बौद्धों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान की जाएगी, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में शोषण से भाग कर यहां आए हैं. हालांकि कांग्रेस पार्टी के साथ विपक्ष ने पहले ही इस पर असहमति जता दी है. वहीं अल्पसंख्यक संगठन भी इस विधेयक से मुस्लिमों को बाहर रखने को लेकर इसका विरोध कर रहे हैं. उनका बोलना है कि किसी भी आदमी को उनके धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करना संविधान के विरूद्ध है.

माकपा ने भी रविवार को प्रेस कांफ्रेस कर बोला कि वे प्रस्तावित विधेयक के लिए दो संशोधन पेश करने वाले हैं.