कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। 


भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

अफगानिस्‍तान की स्थिति पर द‍िल्‍ली में अगले महीने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक होनी है। इसकी मेजबानी भारत करेगा। इस बैठक में कई अन्‍य देशों के साथ रूस और पाकिस्‍तान को भी न्‍योता दिया गया है। बैठक की अध्‍यक्षता भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल करेंगे। माना जाता है कि इस क्षेत्रीय सम्‍मेलन में चीन, इरान, तजाकिस्‍तान और उजबेकिस्‍तान को भी बुलाया गया है। इसमें अफगानिस्‍तान में मानवीय संकट के मसलों पर बातचीत होगी। साथ ही सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। 


प्रस्तावित वार्ता 10-11 नवंबर को हो सकती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक यह सम्मेलन 2019 में ईरान में पहले आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के समान प्रारूप में होगा। एनएसए-स्तरीय बैठक में आमंत्रित लोगों में अफगानिस्तान के पड़ोसी देश- रूस, चीन, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। पता चला है कि उस आमंत्रण को पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ को भी दे दिया गया है, हालांकि सम्मेलन और आमंत्रण पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, पता चला है कि तैयारी चल रही है।


तालिबान से दुनिया को जैसी अपेक्षाएं हैं, उसके बारे भी अवगत कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि जिन देशों के एनएसए को आमंत्रित किया गया है, उन्‍हें पहले ही भारत से निमंत्रण मिल चुका है। हालांकि, इस कॉन्‍फ्रेंस में तालिबान को न्‍योता नहीं दिया गया है। यह बैठक नवंबर के दूसरे हफ्ते में प्रस्‍तावित है।

रूस ने भी 20 अक्‍टूबर को मॉस्‍को में इसी तरह का सम्‍मेलन रखा है। इसमें भारत के साथ-साथ उसने तालिबान को भी बुलाया है। हालांकि, भारत सरकार तालिबान को यहां बुलाने को लेकर अभी असमंजस में है। कारण है कि तालिबान को अभी अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। खासतौर से मानवाधिकार से जुड़े मसलों को लेकर अभी उससे कहीं ज्‍यादा अपेक्षा हैं। इनमें महिलाओं, बच्‍चों और अल्‍पसंख्‍यकों के मानवाधिकार शामिल हैं।


यह देखना दिलचस्‍प होगा कि पाकिस्‍तान कॉन्‍फ्रेंस में क्‍या भूमिका अदा करता है। देखने वाली बात तो यह भी होगी कि पाकिस्‍तानी एनएसए मोईद यूसुफ आते हैं कि नहीं। अगर ऐसा होता है तो 2016 में अमृतसर में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश सलाहकार सरताज अजीज के बाद दोनों ओर से यह किसी उच्‍चाधिकारी का पहला दौरा होगा। इस साल मई में भी भारत ने अफगानिस्‍तान पर कॉन्‍फ्रेंस का प्रस्‍ताव किया था। तब भी यूसुफ को न्‍योता दिया गया था। हालांकि, दिल्‍ली में कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह बैठक नहीं हो पाई थी।