CBI ने देशभर की जाँच एजेंसियों को किया आगाह कोरोना जानकारी के जरिए चोरी हो रही बैंक डिटेल

CBI ने देशभर की जाँच एजेंसियों को किया आगाह कोरोना जानकारी के जरिए चोरी हो रही बैंक डिटेल

CBI ने देशभर की जाँच एजेंसियों को आगाह किया है कि देश में साइबर अपराध बढ़ रहा है। कोरोना वायरस महामारी के नाम पर ठग लोगों को अपनी जानकारी देने का झांसा देकर SMS या Email के जरिए Malicious Software भेजा रहे है। 

इस सॉफ्टवेर को डाउनलोड करने के बाद COVID-19 से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी। लेकिन असल में ये सॉफ्टवेयर के जरिये फोन में या लैपटॉप में बैंक/क्रेडिट कार्डों से जुड़ी जानकारी को चुराने के लिए है। इंटरपोल ने CBI को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक, इस Malicious Software का नाम Cerberus है जो कि Banking Trojan के नाम से भी जाना जाता है।

इंटरपोल के मुताबिक, ये Trojan बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जिसमे क्रेडिट कार्ड की जानकारी व Two Factor Authentication की जानकारी भी चुरा सकते हैं। आइये आपको बताते हैं कि किन-किन उपायों से कोरोनाकाल में आपका बैंक एकाउंट खाली करने की योजना बनाई जा रही है।

इन 10 उपायों से आम लोगों के पैसों की होती हैं खाते से चोरी (1) कार्ड के डाटा की चोरी- एटीएम कार्ड के डाटा की चोरी के लिए जालसाज कार्ड स्कीमर का प्रयोग करते हैं। इसके जरिए जालसाज कार्ड रीडर स्लॉट में डाटा चोरी करने की डिवाइस लगा देते हैं व डाटा चुरा लेते हैं। इसके अतिरिक्त फर्जी की बोर्ड के जरिए भी डाटा चुराया जाता है। किसी दुकान या पेट्रोल पंप पर अगर आप अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि कर्मचारी कार्ड को आपकी नजरों से दूर ना ले जा रहा हो।


(2) एटीएम कार्ड की क्लोनिंग- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बताते हैं कि पहले सामान्य कॉल के जरिए ठगी होती थी लेकिन अब डाटा चोरी कर पैसे खाते से निकाले जा रहे हैं। ठग हाईटेक होते हुए कार्ड क्लोनिंग करने लगे हैं। एटीएम कार्ड लोगों की जेब में ही रहता है व ठग पैसे निकाल लेते हैं। एटीएम क्लोनिंग के जरिए आपके कार्ड की पूरी जानकारी चुरा ली जाती है व उसका डुप्लीकेट कार्ड बना लिया जाता है। इसलिए एटीएम प्रयोग करते वक्त पिन को दूसरे हाथ से छिपाकर डालें।

(3) बैंक खातों की जाँच के नाम पर ठगी- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बैंक खातों की जाँच आपको समय-समय पर करनी चाहिए व अस्वीकृत लेनदेन के बारे में तुरंत अपने बैंक को जानकारी देनी चाहिए।

(4) जॉब के नाम पर औनलाइन फ्रॉड- कई नौकरी पोर्टल संक्षिप्त विवरण को लिखने, विज्ञापित करने व नौकरी अलर्ट के लिए फीस लेते हैं, ऐसे पोर्टलों को भुगतान करने से पहले, वेबसाइट की प्रमाणिकता व समीक्षाओं की जाँच करना महत्वपूर्ण है।

(5) शादी की वेबसाइट पर लोगों के साथ ठगी- अगर आप औनलाइन मैट्रिमोनियल साइट पर पार्टनर की तलाश कर रहे हैं तो जरा सावधान रहिए क्योंकि इसके जरिए भी ठगी हो रही है। चैटिंग के जरिए फ्राड करने वाले आपके बैंक खाते से जुड़ी जानकारियां मांगते हैं। ऐसे में बैंक खाते से रकम उड़ा ली जाती है। गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा विभाग के मुताबिक औनलाइन वैवाहिक साइट पर चैट करते वक्त व्यक्तिगत जानकारी साझा ना करें व साइट के लिए अलग से ई-मेल आईडी बनाएं व बिना किसी पुख्ता जाँच किए व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।

(6) व्हाट्सऐप कॉल के जरिए फर्जीवाड़ाअगर व्हाट्सऐप पर किसी अनजान नंबर से वॉइस कॉल आती है तो आप सावधान हो जाइए क्योंकि फोन करने वाला आपको ठग सकता है। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आपके नंबर को ब्लॉक कर सकता है। वॉइस कॉल करने वाला अपनी ट्रिक में फंसाकर आपके पैसे हड़प सकता है।

(7) यूपीआई के जरिए ठगी- यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस के जरिए किसी को भी सरलता से पैसे भेजे या मंगाए जा सकते हैं। यूपीआई के जरिए ठग किसी आदमी को डेबिट लिंक भेज देता है व जैसे ही वह उस लिंक पर क्लिक कर अपना पिन डालता है तो उसके खाते से पैसे कट जाते हैं। इससे बचने के लिए अनजान डेबिट रिक्वेस्ट को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। अजनबियों के लिंक भेजने पर क्लिक ना करें।

(8) क्यूआर कोड से धोखाधड़ी- क्यूआर यानी क्विक रिस्पांस कोड के जरिए जालसाज ग्राहकों को भी लूटने का कार्य कर रहे हैं। इसके जरिए मोबाइल पर क्यूआर कोड भेजा जाता है व उसे पाने वाला शख्स क्यूआर कोड लिंक को क्लिक करता है तो ठग उसके मोबाइल फोन का क्यूआर कोड स्कैन कर बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं।

(9) लॉटरी, पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर औनलाइन ठगी- साइबर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बीते दिनों टीवी कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर लाखों रुपये की लॉटरी निकालने का झांसा देकर कई लोगों के साथ औनलाइन धोखाधड़ी हुई है। वहीं, पिछले साल, देश की सबसे बड़ी तेल मार्केंटिंग कंपनी IOC ने अपनी वेबसाइट पर पेट्रोलपंप की डीलरशिप के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी दी थी।

(10) ई-मेल स्पूफिंगई-मेल स्पूफिंग के जरिए ठग ऐसी ई-मेल आईडी बना लेते हैं जो नामी गिरामी कंपनियों से मिलती-जुलती होती हैं व फिर सर्वे फॉर्म के जरिए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर डाटा चुरा लेते हैं। गूगल सर्च के जरिए भी ठगी के मुद्दे सामने आए हैं। जालसाज सर्च इंजन में जाकर मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर अपना नंबर डाल देते हैं व अगर कोई सर्च इंजन पर कोई खास वस्तु तलाशता है तो वह फर्जी साइट भी आ जाती है।

इसलिए इंटरपोल ने सीबीआई के जरिए देश की सुरक्षा एजेंसियों व लोगों को भी आगाह किया है कि COVID-19 के नाम पर धोखाधड़ी से सावधान रहें व अनचाही वेबसाइट व लिंक्स को न खोलें।