आईसीएमआर के अनुसार, देश में 97,89,066 सैंपल की हो चुकी जाँच, जाने खबर

आईसीएमआर के अनुसार, देश में 97,89,066 सैंपल की हो चुकी जाँच, जाने खबर

राज्यों की सुस्ती के चलते देश कोरोना की जाँच की मौजूदा क्षमता का प्रयोग तक नहीं कर पा रहा है. 19 दिन पहले केन्द्र सरकार ने रोज तीन लाख सैंपल की जाँच क्षमता विकसित होने का दावा किया था, लेकिन अब तक यह आंकड़ा ढ़ाई लाख भी पार नहीं कर पाया है.

 स्थिति यह है कि पहला मरीज मिलने के 157 दिन बाद भी 137 करोड़ की आबादी वाले देश में एक प्रतिशत लोगों की जाँच नहीं हो पाई है. आईसीएमआर के अनुसार, देश में 97,89,066 सैंपल की जाँच हो चुकी है.


दरअसल, देश में पहला संक्रमित 30 जनवरी को मिला था लेकिन जाँच 20 जनवरी से पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी में प्रारम्भ हो चुकी थी. उस दौरान रोज 200 से 250 सैंपल की जाँच प्रयोगशाला में हो रही थी. हालांकि, बीते 157 दिन में प्रयोगशाला में 1100 गुना व रोज सैंपल जाँच क्षमता में 1200 गुना वृद्घि के बाद भी जाँच उस गति से आगे नहीं बढ़ी, जिसका लक्ष्य केन्द्र ने रखा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पांच बार केन्द्र की ओर से राज्यों को लेटर लिख जाँच बढ़ाने, मरीजों की समय पर पहचान करने व आइसोलेशन निगरानी के लिए अपील कर चुका है लेकिन स्थिति में परिवर्तन नहीं हुआ है.

16 जून तक थी 3 लाख जाँच क्षमता

16 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में रोज तीन लाख सैंपल जाँच की क्षमता होने की पुष्टि की थी. तब प्रयोगशाला की संख्या 907 थी जोकि रविवार को 1100 पहुंच गई है. हालांकि, 16 जून तक प्रतिदिन औसतन 1.40 लाख सैंपल की जाँच हो रही थी जोकि अब 2.40 तक पहुंची है लेकिन मौजूदा क्षमता की बात करें तो केन्द्र सरकार के ही अनुसार हिंदुस्तान एक दिन में साढ़े तीन लाख सैंपल की जाँच सरलता से कर सकता है. बीते एक दिन में 2.48 लाख सैंपल की जाँच हुई है.

10 हजार सैंपल जांचने की क्षमता पर जांचे जा रहे सिर्फ 2 हजार

हैदराबाद में रोज10 हजार सैंपल जांचने की क्षमता है लेकिन 2 से 3 हजार सैंपल की जाँच हो रही है. उत्तर प्रदेश में भी 130 प्रयोगशाला हैं, जहां 32 हजार से अधिक सैंपल की जाँच हो सकती है लेकिन यहां भी मौजूदा क्षमता का प्रयोग नहीं हो रहा है.

मरीजों की मृत्यु को रोक सकती है समय पर जाँच : डाक्टर सौम्या

आईसीएमआर की पूर्व महानिदेशक व डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डाक्टर सौम्या स्वामीनाथन का बोलना है कि हिंदुस्तान में जाँच में तेजी पर खुशी है. स्वदेशी किट्स से बेहतर काम किए जा रहे हैं जिन्हें आगे भी जारी रखना महत्वपूर्ण है. जांच, निगरानी, आइसोलेशन व क्वारंटीन पर फोकस करना होगा.

दिल्ली से लेनी चाहिए सीख : नीति आयोग

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी राज्यों से टेस्टिंग, ट्रेसिंग व ट्रीटिंग पर ध्यान देने की अपील की है. उनका बोलना है कि प्रति 10 लाख आबादी पर सबसे ज्यादा जाँच 32,863 दिल्ली में हो रही हैं जो बाकी राज्यों को भी करना चाहिए.